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Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Imtihan baaki hai
Imtihan baaki hai
मेरे अल्फाज़

इम्तिहान बाकी है

  • Sneha Verma
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017
माथे की सलवट
आंखों की डबडब
पलकों की थकावट
फिर भी नज़रों में उम्मीद का तेज बाकी है,
ज़िंदगी शायद कुछ और इम्तिहान बाकी है।

बदन में थरथराहट
बाजुओं में कंपकंपाहट
क़दमों की डगमगाहट
फिर भी एक मंज़िल पर पहुंचना बाकी है
ज़िन्दगी शायद कुछ और इम्तिहान बाकी है।

चेहरे की झुर्रियां
सिर पर सफेदियां
होठों की कहानियां
फिर भी हक़ीक़त के किस्से सीखना बाकी है
ज़िन्दगी शायद कुछ और इम्तिहान बाकी है।

वो था दर्पण
किया जीते जी तर्पण
जिस पर पूरा जीवन अर्पण
फिर भी खुद के लिए जीना अभी बाकी है
ज़िन्दगी शायद कुछ और इम्तिहान बाकी है।

- 'स्नेहा वर्मा'

उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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