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Mother

विश्व काव्य

सिक्किम से हमारे पाठक इरफ़ान ने भेजी चीनी कविता 'माँ'

Shayar Irfan

4 कविताएं

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स्कूल का वह दिन पहला;
मेरा बस्ता नया उठाती थी।
उस बारिश में वह छाता;
मेरे सिर पे लगाती थी।
मेरी पसंद की वह सब्ज़ी;
मेरे लिए कोई पकाती थी।
आँखों में मेरे आते आँसु;
रुमाल से कोई हटाती थी।
वह माँ है कोई और नहीं;
हाँ माँ है कोई और नहीं।
उस माँ ने मुझको जनम दिया;
उस माँ ने दिया घर ग्राम।
चाहे कितनी दूर चला जाऊँ;
भले करूँ कोई भी काम।
भुलाए न भूल पाऊँगा;
ऐ माँ तेरा बलिदान!
भुलाए न भूल पाऊँगा;
ऐ माँ तेरा बलिदान!
रहूँ जब मैं परदेस में;
कोई फ़िकर में घुली जाती है।
अब भी मैं घर जाता हूँ;
तुरंत चाय बना कर लाती है।
जब हुआ बीमार पकड़ा बिस्तर;
कोई चुपके चुपके रोता है।
जब मैं खिलखिलाता हूँ;
किसी का दिल खिल जाता है।
वह माँ है कोई और नहीं;
हाँ माँ है कोई और नहीं।
उस माँ ने हमको जनम दिया;
उस माँ ने दिया घर ग्राम।
चाहे कितनी दूर चले जाएँ;
भले करें कोई भी काम।
रे बन जाएँ धन्ना सेठ;
रे बन जाएँ हाकिम महान।
भुलाए न भूल पाएँगे;
ऐ माँ तेरा बलिदान!
भुलाए न भूल पाएँगे;
ऐ माँ तेरा बलिदान!

- चाङ च्युनई (चीनी कवि)
अनुवाद: इरफ़ान अहमद 
व्याख्याता, चीनी विभाग, सिक्किम केन्द्रीय  विश्वविद्यालय

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