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मेरे अल्फाज़

ये नाटक के मंच

Shambhu Amlvasi

3 कविताएं

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ये नाटक के मंच
ये थियेटर की गलियां
ये रोज बजते पुरानी फ़िल्मों के गीत
ये रोज बनते अच्छे नए दोस्त
जानता हूं मेरे भविष्य के काम के नहीं
लेकिन मेरी बेहतर जिंदगी के काम के हैं।

- शम्भू अमलवासी

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