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मेरे अल्फाज़

जिंदगी

Shambhu Amlvasi

3 कविताएं

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जिंदगी

जिंदगी के कुछ बचे सालों में
मैं सोच रहा था कि उम्र 20
के पार होते ही ये जिंदगी
बार-बार एहसास दिलाती रहती
है कि समझदार हो गये हो,
फिर
बार-बार गलतियां क्यों करते रहते हो।

उम्र के साथ बड़े हुए भी हो या नहीं?
या वो ही पुराना भोलापन और बांकपन
ठूस रखा है अपने अंदर।

एक बात कान खोलकर सुन लो
माना कि ये जिंदगी इंसान को
जिंदगी में तीन बार बच्चा बनाती है
एक पैदा होते ही, एक इश्क़ में और
अंतिम जब चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं
हाँ, बुढ़ापा आता है तब।

तो ध्यान से सुन ले ये जो दूसरे नंबर का
बच्चा हैं न, इससे बचकर रहियो ।
ये बच्चा है ना
तेरे से बहुत कुछ लिखवा देगा
और आगे जाकर पता है क्या होगा
सब मिट जायेगा।

पता है क्यों ?
क्योंकि आँसूओं से लिखे गये
हर्फ़ और उससे बने लब्ज़
ज्दाया दिन जिंदा नहीं रहते।

वो सूख जाते हैं, मिट जाते हैं और सारी
वेदना संवेदना अपना अस्तित्व त्याग देती हैं
फिर तुम जिन्दा हो या मुर्दा
अंदाज़ा नहीं लगा पाओगे इसलिए सुधर जाओ।

- शम्भू अमलवासी

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