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Ye mulk shan se
मेरे अल्फाज़

हमारी पाठक शालिनी कौशिक ने बयां की मुल्क की शान

फरमा रहा है फख्र से ,ये मुल्क शान से ,
कुर्बान तुझ पे खून की ,हर बूंद शान से।

फराखी छाये देश में ,फरेब न पले ,
कटवा दिए शहीदों ने यूँ शीश शान से .

देने को साँस लेने के ,काबिल वो फिजायें ,
कुर्बानी की राहों पे चले ,मस्त शान से .

आज़ादी रही माशूका जिन शूरवीरों की ,
साफ़े की जगह बाँध चले कफ़न शान से .

कुर्बानी दे वतन को जो आज़ाद कर गए ,
शाकिर है शहादत की हर नस्ल शान से .

इस मुल्क का गुरूर है वीरों की शहादत ,
फहरा रही पताका यूँ आज शान से .

मकरूज़ ये हिन्दोस्तां शहीदों तुम्हारा ,
नवायेगा सदा ही सिर सरदर शान से .

पैगाम आज दे रही कुर्बानियां इनकी ,
घुसने न देना फिर कभी सियार शान से .

करते हैं अदब दिल से अगर हम शहीदों का ,
छोड़ेंगे बखुशी सब मतभेद शान से .

इस मुल्क की हिफाज़त दुश्मन से कर सकें ,
सलाम मादरे-वतन कहें आप शान से .

मुक़द्दस इस मुहीम पर कुर्बान ''शालिनी'' ,
ऐसे ही सिर उठाएगा ये मुल्क शान से .

- शालिनी कौशिक
[कौशल]

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