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Love Beyond Name

मेरे अल्फाज़

नाम से परे मोहब्बत

Saurabh Mishra

6 कविताएं

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नाम से परे!"मोहब्बत"

कुछ अलग नहीं था
फ़िर भी अलग था
उन दोनों की मोहब्बत में
बात नहीं कर रहे थे
फ़िर भी खामोश न थे
इस कदर एक दूसरे में थे
अलग होते हुए भी अलग न थे

कैफ़ियत थी दोनो के दरमियां
लाग-लपेट नहीं था दोनों में
दोनों खुलेआम इज़हार कर रहे थे मोहब्बत का
लेकिन फ़िर भी लिहाज़ कर रहे थे ज़माने का
बंदिशे तोर तो शायद कब की दी थी
फ़िर भी अपने दरमियान एक फ़ासला रखा था

शायद ख्याल रखना आता था उन्हें
अपने इलावा औरों से जुड़ी मोहब्बत का भी
और हँ! सबसे बड़ी बात तो ये थी
एक दुसरे को पाने की भूख न थी
इत्मिनान था तो बस इतना की साथ बैठे हैं
इसलिए इज़हारे मोहब्बत भी की नहीं कभी

वैसे ये ज़रूरी तो नहीं हर रिश्ते का नाम हो
क्यों? बस मोहोबत नहीं हो सकती, बेइंतिहा मोहोबत!
क्या वो वक्त भी आएगा
नाम से परे हो जायेगी मोहब्बत
ये सवाल दिख रहा था उनकी मोहब्बत में
अब जब सवाल आया था
तो जवाब भी आया ही होगा
और जवाब था उनकी मोहब्बत

- सौरभ मिश्रा


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