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Kabhi ho jaun kamjor agar

मेरे अल्फाज़

कभी हो जाऊं कमजोर अगर

Saroj Yadav

12 कविताएं

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कभी हो जाऊं कमजोर अगर हालात नही संभले मुझसे,
मुझे ले चलने तुम आके प्रभु पर पथ से डिगने मत देना। 

तेरी दुनिया कितनी प्यारी है आखिर तेरी फ़ुलवारी है
हां जो थोड़े इनमे कांटे हैं वो तो जान के तुमने बांटे हैं। 

कांटों की चुभन मिल जाये भले उलझन में पड़ने मत देना,
मुझे ले चलना तुम आके प्रभु पर पथ से डिगने मत देना। 

ये जीवन है उपहार तेरा तूँ जो भी चाहे स्वीकार मुझे,
मेरे सुख दुख तुझपे निर्भर हैं जो तेरी खुशी तूँ देदे मुझे। 

बस दुख की छाया से घबराकर मुझे गलती करने मत देना
मुझे ले चलना तुम आके प्रभु पर पथ से डिगने मत देना। 

दुख हर न सकूं जो लोगों के गर हो जाऊं लाचार कभी
बस है विनती वो दाता मेरे मुझसे न हो कोई जीव दुखी। 

किसी हाल में मेरे हाथों को कोई पाप भी करने मत देना,
मुझे ले चलना तुम आके प्रभु पर पथ से डिगने मत देना

- सरोज यादव""सरु""


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