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 Some memories - Some dreams

मेरे अल्फाज़

कुछ यादें - कुछ सपने

Sachin Om

12 कविताएं

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कुछ यादें-कुछ सपने

यादें एक सरल शब्द है,
केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें,
कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें |
मिलना और मिल के बिछड़ना ,
तस्वीरें देख के आंसू का फिसलना
और रह जानी हैं तो बस क्या, यादें
बस वही यादें...!!!
बस वही यादें ...!!!

जिन्दगी की पहेली बड़ी उलझी सी है

जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है,
सोचता हूं...
सुबह उठूँ ,मस्ती करूं
नदियाँ और झरने देखूं
कुछ मन की उलझनों को पन्नों पर लिख सकूं,
इस खुलें आसमान को छू सकूं
इस दुनिया की खूबसूरती को महसूस कर सकूं
नई ऊँचाइयों की डगर को छू सकूं,
कुछ सपनें बुनूँ और उन्हें जी सकूं
पर जीवन की उलझनों के आगे किसकी चलती है,
जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है |
जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है |

- सचिन ओम 


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