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Pahle Tum Aao To

मेरे अल्फाज़

पहले तुम आओ तो

Rajendra Singh

42 कविताएं

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सुबह की पहली चुस्की
चाय की
प्रिये तुम संग
लेना चाहती हूं
अरे, पहले तुम आओ तो।

दबे पांव तुम आओ
किचन में
भर लो पहलु में
चुपके से मुझको
अरे, पहले तुम आओ तो।

काम पे जाने से पहले
इक हल्का सा चुंबन
प्रिये, मुझे जीवित रखता है
तुम्हारे लौटने तक
अरे, पहले तुम आओ तो।

दिन में इक आवाज तुम्हारी
फोन पे ऑफिस से
कर देती है
बैटरियां रिचार्ज
अरे, बाबा पहले तुम आओ तो।

शाम को जब तुम
लौटकर पुकारते हो
मेरा नाम
इक स्फूर्ति सी भर जाती है मुझमें
पर, पहले तुम आओ तो प्रिये।

तुमसे बतियाती हूं
खिल सी जाती हूं
तुम छूते हो
मैं ही जन्नत हो जाती हूं
अरे, पहले तुम आओ तो।

छोटे छोटे काम
जब तुम मेरे लिये करते हो
बहुत बड़ी हो जाती हूं
मां को भी भूल जाती हूं
अरे, पहले तुम आओ तो।

ओ प्रिये,
तुम्हारी पहली चाय
मेरे संग ही होगी
आतुर हूं
तुम्हें बांहों में रखने को
बैटरिया न होने दूंगा
डिस्चार्ज कभी
अधर ना होंगे
सुर्ख कभी
अब तो हे प्रिये
आ जाओ
दिल मेरा भर जाओ
कब तक यूं तड़पाओगी
दिल मेरा भटकाओगी
हो ना जाए देर कहीं
अब तो आ जाओ प्रिये।।।

- प्रभात


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