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Pahale Aao To

मेरे अल्फाज़

पहले तुम आओ तो

Rajendra Singh

40 कविताएं

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सुबह की पहली चुस्की
चाय की
प्रिये तुम संग
लेना चाहती हूं
अरे, पहले तुम आओ तो।

दबे पांव तुम आओ
किचन में
भर लो पहलू में
चुपके से मुझको
अरे, पहले तुम आओ तो।

काम पे जाने से पहले
इक हल्का सा चुंबन
प्रिये, मुझे जीवित रखता है
तुम्हारे लौटने तक
अरे, पहले तुम आओ तो।

दिन में इक आवाज तुम्हारी
फोन पे ऑफिस से
कर देती है
बैटरियां रिचार्ज
अरे, बाबा पहले तुम आओ तो।

शाम को जब तुम
लौटकर पुकारते हो
मेरा नाम
इक स्फूर्ति सी भर जाती है मुझमें
पर, पहले तुम आओ तो प्रिये।

तुमसे बतियाती हूँ
खिल सी जाती हूँ
तुम छूते हो
मैं ही जन्नत हो जाती हूँ
अरे, पहले तुम आओ तो।

छोटे छोटे काम
जब तुम मेरे लिये करते हो
बहुत बड़ी हो जाती हूँ
माँ को भी भूल जाती हूँ
अरे, पहले तुम आओ तो।

ओ प्रिये,
तुम्हारी पहली चाय
मेरे संग ही होगी
आतुर हूँ
तुम्हें बाँहों में रखने को
बैटरियां न होने दूँगा
डिस्चार्ज कभी
अधर ना होंगे
सुर्ख कभी
अब तो हे प्रिये !
आ जाओ !
दिल मेरा भर जाओ
कब तक यूँ तड़पाओगी
दिल मेरा भटकाओगी
हो ना जाए देर कहीं
अब तो आ जाओ प्रिये ।।

- प्रभात

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