आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Agar Aapko jao to
Agar Aapko jao to

मेरे अल्फाज़

गर आ जाओ तो

Rajendra Singh

39 कविताएं

25 Views
छूते हो
छुईमुई बन जाती हूँ
देखते हो
कमल सी खिल जाती हूँ
आते हो
आह्लादित हो जाती हूँ
जाते हो
जान ही निकल जाती है।

बारह बरस तो
बीत चुके बनवास में
अब भी तुम कहाँ
संग मेरे रहते हो
भूमि को भूमि पर
चलना मैंने ही सिखाया है
कितना दूभर है जीना
मैंने तुम्हें कहाँ बताया है
स्कूल से घर के बीच
हो गया मेरा जीना है
फिर भी प्रियतम मेरे
मैंने तुम्हें वापस
कब बुलाया है

इंतजार है आज भी
कब घर आओगे
भूमि को बहलाओगे
बारह बरस तो
बीत चुके हैं
तेरह की तैयारी है
लड़ते हो तुम सीमा पर
मैं पल पल खुद से लड़ती हूँ
बलिदान की गर बात करें तो
सौ गज आगे रहती हूँ
अब तो आ जाओ प्रियतम
कब से दिल ये कहता है
छुईमुई बन जाऊंगी
कमल सी खिल जाऊंगी
गर तुम
आ जाओ तो।।।

- प्रभात

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!