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मेरे अल्फाज़

विश्वास

Priyanka Srivastava

8 कविताएं

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धुंध में चलते हुए
सब अंधकारमय दिखने लगा।
घबराता मन ललखड़ाते कदम,
थमने को यूं कहने लगा। 

डरे हुए नयन जब,
होने लगें बन्द। 
अहसास कुछ,
यूं छू गया। 

कह गया मुझसे वो,
कर विदा डर को। 
अपने मन का
खोल पट दुई
नैनों के।

शंसा न कर,
रख विश्वास दृढ़। 
है ईश्वरीय अंश,
तुझमे भी कहीं। 

बंद नयन यूं खुल गए
ठहरे कदम यूं चल गए।
धुंध में भी,
प्रकाश ज्योति पुंज
कुछ यूं दिखा।
मानो परमात्मा थामे हाथ मेरा
मुझे आगे बढ़ चला।

-  प्रियंका "श्री"
              


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