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Bas Aesi Awastha Hai Bachpan

मेरे अल्फाज़

बस ऐसी अवस्था है बचपन

prashant mishra

3 कविताएं

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ईश का पद हमको मिला
कन्या यदि हूं तो देवी की तरह ,
कोरे कागज की तरह
है ये मन
बस ऐसी अवस्था है बचपन।

न छल, न कपट
न द्वेष है मुझमें
बस प्रेम की भाषा समझता हूं मैं ,
न क्रुद्ध होते हैं हम
बस ऐसी अवस्था है बचपन।

अब ये जो बचपन
अमीर घर जन्मा तो बात कुछ और है,
गर गरीब हूं मैं
तो मेरा क्या कुसूर है ,
ये कैसे हैं दुनिया के जन।

मां की ममता, पिता का उपकार
मिलता है हमको
सबका प्यार पर ,
भूल जाते हैं हम
बस ऐसी अवस्था है बचपन।

- प्रशांत मिश्र 


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