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Mauj manao

मेरे अल्फाज़

मौज मनाओ

Piyush Agnihotri

1 कविता

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घोर निराशाओं के बल से
विपदाओं के आमंत्रण पर
सूरज उगना छोड़ रहा है
अंधियारों तुम मौज मनाओ

प्रतिकारों के उन्मादों से
मुस्कानों के क्रंदन पर
विद्रोहों के आवेगों से
खुद के ही संवेगों पर
सावन के रुखेपन से
पतझड़ के संज्ञानों पर
निर्धन जीना छोड़ रहा है
दौलतमंदों मौज मनाओ.......

नयनों के घायल होने से
ह्रदयों के आघातों पर
नमक छिड़कने से लेकर के
और कुरेदे जाने पर
दर्दो के रोने भर से
आहों के भर जाने पर
प्रगतिशीलता छोड़ रहा हूँ
जलने वालों मौज मनाओ।
पीयूषअग्निहोत्री
यह रचना मेरी स्वरचित है

- पीयूष अग्निहोत्री 

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