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मेरे अल्फाज़

पानी चाहता है

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पानी चाहता है !
न नेट मांगता है न वाई फाई मांगता है !
न ऐसी कोई चीज़ हाई फाई मांगता है !!
दे दो गर देना है औकात हो तो !
सीने पर दिल जुबां पे बात हो तो !!
निकल गई मन से धर्म और जात हो तो !
जिन्दा तुम्हारे ज़ज़्बात हो तो !!
नहीं अब वो जवानी चाहता है !
नहीं वह रवानी चाहता है !
न सुनना कोई कहानी चाहता है !
वह तो केवल पानी चाहता है !!
जीवन उसको खल रहा है !
उसका मन अब मचल रहा है !!
कल से खाया रोटी एक !
बेटा फिर भी पल रहा है !!
आज फिर सोएगा भूंखा !
इस बरस फिर पड़ा है सूखा !
पेड़ में न पत्ते आए !
सूख कर खड़ा है ठूंठा !!
क्यों न उसे दे दें अभी !
वह तो केवल पानी चाहता है !
रुक गया है !
थक गया है !!
लगता है !
वो डर गया है !!
नहीं वो नहीं डरेगा !
तिमिर गेह पर वो बढेगा !!
है नहीं आसान खेती !
कहता है फिर भी करेगा !!
चाहता हूँ निचोड़ ले मुझको !
निकाल ले मेरा वो पानी !!
क्यों न उसे मैं ही दे दूं !
आखिर वो पानी चाहता है !!
नहीं वो जवानी चाहता है !
केवल वो पानी चाहता है !!
घट रहे हैं आशियाने !
मर रहे हैं अब शयाने !!
आओगे कृष्णा कब तुम !
इनकी यह तृष्णा मिटाने
हो रहे कमज़ोर बच्चे !
हैं उमर के बड़े कच्चे !!
मानते हैं बात सबकी !
दिल से होते वो भी सच्चे !!
जिंदगी अब खो रही है !
म्रत्यु बीज बो रही है !
दिन तो फिर भी जागता है !
रात अब तो रो रही है !!
तम अभी भी बढ़ रहा है !
गम अभी भी बढ़ रहा है !!
कम न होते शोक बादल !
कष्ट नए वो गढ़ रहा है !!
देख न तुम याद रखना !
जारी वही फरियाद रखना !!
बरसेंगे एक रोज़ बादल !
बात यही तुम याद रखना !!
उसके हाथ को धानी कर दें !
क्यों न पानी पानी कर दें !!
आखिर वो पानी चाहता है !
नही वो जवानी चाहता है !!
देखो कुछ बढ़ रहा है !
आसमां में चढ़ रहा है !!
यह तो हैं घन घोर बादल !
हुए किसान सब छोड़ पागल !!
और नहीं कुछ भाता अब !
देखो बादल आता अब !!
बरस रहा है जमकर पानी !
सुरु हुई फिर नई कहानी !!
देख पानी गया बुढ़ापा !
सब को फिर है चढ़ी जवानी !
ढोल बजाए गाए गीत !
बच्चों संग अब नाचे नानी !!
सुरु हुई फिर नई कहानी !
बरस रहा है जमकर पानी !!



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