आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   paatiyo se ashk ने puncha rumani ki vajah
paatiyo se ashk ने puncha rumani ki vajah

मेरे अल्फाज़

पातियों से अश्क ने पूंछा रुमानी की वजह

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

43 Views
धड़कनों पर सदा तूने बोलियां ही है लगाई
क्या कभी खुद से है पूंछा बदजुबानी की वजह

पास आकर भूल जाना ये तो है तेरी सदा
क्या कहूँ बस यही मेरी ज़िन्दगानी की वजह

मैने तेरी धड़कनों में जिंदगी जी ली अतुल
पर तुझे मैं क्या कहूँ बस रहनुमाई की वजह

याद की जब भूख पर संदूक के ताले खुले
पातियों से अश्क ने पूंछा रुमानी की वजह

बोल उठ्ठा धड़कने है कैद शब्दों में यहाँ
पातियां विश्वास तेरी, ज़िन्दगानी की वज़ह

- अतुल अवस्थी*अतुल*

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।

 
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!