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मेरे अल्फाज़

मन मौसम

neha dubey

13 कविताएं

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बदलते मौसम की तरह ही
खुद को हर रोज़ बदलतें देखा है

मैंने अपने मन मे हर मौसम को
गुजरते हुये देखा है।

कभी बहार वादियों सी
तो कभी पतझड़ के सूखे पत्तों सी
नीरस बेजान बेरंग भाव लिए
तो कभी हरियाली लिए सावन सी
मैंने नई कोपलों को फूटते हुये देखा है ।

-नेहा दूबे

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