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mahatari piyari hamari hamai

मेरे अल्फाज़

महतारी पियारि हमारि हमै

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

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महतारी पियारि हमारि हमै।
उह रौजै जोंधैया बुलावति है॥

हम साँस भरी धकियाई उहै।
पर अम्मा कन्हैया बुलावति है॥

लिबरानी जौ आँखि रहै हमरी।
कीची काची का गाय छोड़ावति है॥

दुई कौर खवावय के खातिर ऊ।
हर कौर मा कान्हा बुलावति है॥

महतारी तौ देवी कै रूप अहै।
देवी देउता कै सारे स्वरूप अहै॥

कबहूं चंदा मामा से बात करै।
महतारी उदासी का मात करै॥

बबुआ जौ उदास रहै तनिकौ।
मिर्चा औ लोबान का हाथ धरै॥

बबुनी के बीमारी पै जागा करै।
महतारी से भूतौ तौ भागा करै॥

महतारी तौ आँसू का रोज़ हरै।
सगरिउ मन घाव का रोज़ भरै॥

खुदै भूखी रहै पर खवावा करै।
भगवानौ तौ शीश नवावा करैं॥

- अतुल अवस्थी "अतुल"

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