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मेरे अल्फाज़

लाल

kartik srivastava

42 कविताएं

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लाल

मैं धरा हूँ लालो लाल
मेरी आँखें लाल लाल
मैं जनी हूँ लालो लाल
मेरी बातें लाल लाल ।।

मेरे खेलें लालों लाल
मैं चली हूँ लालो लाल
मैं धरा हूँ पूरी लाल
मैं खेलूं लाल गोपाल।।

मैं पालनहार तेरी
मैं रक्षा करती तेरी
ठिया मुझमें बनाओ
दुश्मन रार भगाओ ।।

आशीष मेरा तुझको
शपथ मेरी ही लेना
दुश्मन मार गिराना
दौड़ा दौड़ा धर लेना ।।

हाल-बेहाल करना
पूरा बेदम करना
कर पूरा लालो लाल
दुश्मन दूर भगाना ।।

ऐ मेरे लाल गोपाल
सूंदरकांड करूंगी
कर शांति का आभास
पाठ वेद पर दूंगी ।।

- अनुपम कुमार श्रीवास्तव
   कानपुर

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