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मेरे अल्फाज़

नादां बच्चा

kartik srivastava

42 कविताएं

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 नादाँ बच्चा

मां तेरा छोटा बच्चा हूँ
प्यारा प्यारा सच्चा हूँ
तेरी आँखों में बसता हूँ
तेरे सपनों को रचता हूँ ।।

मां नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ
तेरी आंखन का सच्चा हूँ
तेरा अश्क ही लगाता हूँ
तेरे बचपन की छाया हूँ ।।

मां तुम प्यारी प्यारी हो
सुंदर मय दीप सुहानी हो
दुःख दर्द सभी हर लेती हो
आईना रोज दिखाती हो ।।

मां तेरा नादां बच्चा हूँ
तेरी आंखों का तारा हूँ
मां सुंदर और दुलारा हूँ
शैतानी में भी प्यारा हूँ ।।

मां मेरी तू निराली है
मां मैं बहुत आभारी हूँ
तेरी आभा निराली है
मैं नादाँ तू ही आली है ।।

जब कभी शरारत करता हूँ
गुस्सा भी मुझ पर करती हो
कभी तू रोती, कभी हंसती
कभी बलैया तुम लेती हो ।।

गुस्से से मैं डर जाता हूँ।
डर से डरता ही जाता हूँ
माँ मैं श्रवण सा बेटा हूँ
तेरा कहा ही मानता हूँ ।।

माँ मैं शरारती बच्चा हूँ
मां मेरी भोली भाली है
गुस्से में भी कह देती है
जा न, जा चूल्हे में जा ।।

एक दिन ऐसा आया था
मैं चूल्हे में जा बैठा था
चूल्हा मुझको देख कर हँसता
मैं चूल्हे में जा लिपटा था ।।

मां अब भी भोला भाला हूँ
तेरा ही सच्चा बच्चा हूँ
राखी सोंधी सोंधी खुश्बू
चूल्हे से मुझको आती है।।

सोंधी मिट्टी खिली हुई थी
राख राख से सरोकार थी
मां तू मेरी खिली हुई थी
राखी तन में सराबोर थी ।।

- अनुपम कुमार श्रीवास्तव,
  कानपुर

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