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मेरे अल्फाज़

तेरे गम में

kartik srivastava

43 कविताएं

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तेरे गम में

जीने का तेरे गम ने सलीका सीखा दिया
फक्कड़ी में रहने का तरीका बता दिया।।

नज़रों का नज़र नज़रात यों पेश कर रहे
साकिया मुझे दिन रात मंज़र दिखा दिया ।।

दर्द-ए-अश्क चमन में जुल्मों को सह रहे
अश्क को चमन में फ़ाज़िल कहा दिया ।।

दोस्त भी दुश्मनों पर ऐतबार कर रहे
जख्म -ए - हालात पर खुद मुस्करा दिया ।।

सुक्रिया दोनों का निगाहों में सुबुक रहा
अच्छा किया इल्म को ऐसा सिला दिया ।।

-अनुपम कुमार श्रीवास्तव
 कानपुर

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