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मेरे अल्फाज़

बीती रतिया में

kartik srivastava

43 कविताएं

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बीती रतिया में

बीती रतिया में सजनवा आए गयो रे
सजनवा आए गयो रे ,
निंदिया उड़ाये गयो रे
दिल की चोरी कराए गयो रे
नैनन से नयना मिलाय गयो रे ।।

बीती रतिया में ख्वाब दिखाए गयो रे
दिखाए गयो रे नैना लड़ाए गयो रे
रतिया में नशा कराए गयो रे
गालों की गुलाबी चुराए गयो रे
दिल की धड़कन बढ़ाये गयो रे
छुटका सा दिलासा दिलाय गयो रे।।

बीती रतिया में निंदिया .......
बीती रतिया में पहेलियां बुझाये गयो रे
संग संग चलने को कह गयो रे
दिल का मिलान कराए गयो रे
बीती रतिया में संग संग बिताए गयो रे ।।

ओ सखी रे
तोरे आंखन की बतिया बताए दीनी रे
तोरे पाजेब की झंकार सुनायें दीनी रे
धक धक दिल धड़काये गयो रे
ओ बीती रतिया में------

- अनुपम कुमार श्रीवास्तव



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