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मेरे अल्फाज़

बाला बाला मेरी बाला

kartik srivastava

43 कविताएं

34 Views
हाल हाला मेरी बाला
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हाला हाला मेरी बाला
चलते कदमों की सहबाला
मैं में बाला की मय शाला
मैं पहला पहला सहबाला ।।
👍👍
मेरी बाला मेरी शाला
पल पल हिसाब करती शाला
संग संग रहती मय शाला
मय लब खूब कराती शाला ।।
👍👍
पी के ही मय लब पाने को
पी की बातें समझानें को
मय का अहसास कराने को
मय लब नज़र पी कराने को ।।
👍👍👍👍

दूर कहीं न जाने देती
नुक्कड़ नुक्कड़ में रहती है
चार कदम में दिख जाती है
दवा रूप में भी मिलती है
👍👍👍👍

सात समंदर पार कराती
पिया फिकर भी मय में रखती
सांझ सवेरे मय मैं चखती
सुबह सांझ मय में मैं कहती

👍👍👍👍

तू पी की मैं मय को रखती
सजती धजती मय को कहती
पी के लब में मै को चखती
पिया पिया कह मय को भजती ।।
👍👍👍👍

झूमता नाचता गाता मैं
तिरे तरन्नुम में रहता मैं
अहसास मय याद आता मैं
लब पर लब रख मय जाता मैं ।।
👍👍👍👍
हाला हाला मेरी बाला ।
मैं उसका होता रखवाला
चाँद चाँदनी है महबूबा
ऐसी मेरी हाला बाला ।।
👍👍👍👍

- अनुपम कुमार श्रीवास्तव
कानपुर

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