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मेरे अल्फाज़

हलाहल

kartik srivastava

40 कविताएं

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हलाहल

मय-सुर बाला, मय- मधुशाला
चलते चलाते, पीते -पिलाते
पल-पल महक, बिखराते जाते
दिलवाले भी आते-जाते।।

अनूठी मेरी प्रेम कहानी
जग दीवाना मैं बौरानी
दिलवाले की मैं दीवानी
पीने वालों की मेहरबानी ।।

माल गुजारी चुकाते जाओ
कुछ कर मुझको देते जाओ
दिलवाले ही मेरी आली
मैं बाला सिर्फ प्रेम दीवानी।।

प्रेम रसों में पिरो-पिरो कर
वफ़ा दिल वाले मुझ पर छाए
यादों के तरन्नुम में आकर
पीने वाले प्रेम जताएं ।।

चार गुज़रे मेरे प्यालों से
दो मय पीने को होड़ में
दो मय छोड़ों की होड़ में
बीती जुबानी मेरी कहानी ।।

-अनुपम कुमार श्रीवास्तव
  कानपुर

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