आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   jab bitiya godi me ati to man kavita ban jata hai

मेरे अल्फाज़

जब बिटिया गोदी में आती तो मन कविता बन जाता है

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

53 Views
जब बिटिया गोदी में आती तो मन कविता बन जाता है
तोतले शब्द गदगद करते जीवन संगीत सुनाता है

मुस्कान देखकर बिटिया की जीवन हमको छू जाता है
हर स्वांस बलैया लेती है तन मन हर्षित हो जाता है

बिटिया के संग दौड़ा भागा तो पहुँच गया मैं बचपन में
कांधे पर बिटिया खूब हंसी जैसे हँसता था बचपन में

बिटिया के बचपन में मैने अपने बचपन को ढूंढ लिया
छोटे से अपने आंगन में बिटिया संग जीवन ढूंढ़ लिया

जब घोड़ा बनकर दौड़ चला तो बोल उठी बिटिया मॆरी
पापा मुझको बेटा मानो बस एक सुना दो न लोरी

जब बाल पकेंगे न पापा घोड़ा बन सैर कराऊंगी
पापा तुम चिंता मत करना मैं सभी जगह ले जाऊंगी

तोतले शब्द कानो से टकराए किंकर्त्तव्यविमूढ़ हुआ
बेटी के शब्द समझने को था लगा मुझे मैं मूढ़ हुआ

आंगन के चक्कर एक लगा बेटी को खूब दुलार दिया
बोला तू मेरा बेटा है बेटी बन जीवन सार दिया

- अतुल अवस्थी*अतुल

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!