आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   himanshu jaiswal
himanshu jaiswal

मेरे अल्फाज़

हमारे पाठक हिमांशु कह रहे हैं, 'हौसलों की उड़ान बाकी है'

Himanshu Jaiswal

8 कविताएं

131 Views
अभी तो जिया ही नहीं जीवन हमने
अभी तो पूरी जिन्दगी बाकी है

ये रात बीत जायेगी अंधेरों की
अभी तो रौशनी की नयी सुबह बाकी

अभी भी हारे नहीं हैं "हम"
अभी तो उम्मीदों की "जीत" बाकी है

अभी तो हारे भी नहीं हम "खुदगरजों" से
अभी तो सपनों से दो-दो हाथ बाकी है

अभी तो निकले हैं हम मंज़िल की राह पर
अभी तो पूरी मंज़िल बाकी है

ख्वाहिशों के धागों से उलझ कर टूटे हैं पंख मेरे
अभी तो हौसलों की उड़ान बाकी है

टूटे हैं सिर्फ पंख मेरे
अभी भी जिस्म में रूह और जान बाकी है

अभी तो नापी है सिर्फ मुट्ठीभर ज़मीं हमने
अभी तो पूरा आसमान बाकी है।

- हिमांशु जायसवाल
कल्याणपुर, कानपुर (उ.प्र)

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!