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Sathi companion

मेरे अल्फाज़

साथी

Garima Anjul

15 कविताएं

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साथी

हर सफर हर राह में नित्य साथी नए बनते गए
कुछ पीछे पुराने छूटते कुछ फिर नये मिलते गए,

कुछ चले बस दो कदम संग कुछ मीलों तक गए
कुछ ने ऐसी छाप छोड़ी ना दिल से वो भूले गए,

अकेले ही हर कोई आये और दुनिया छोड़ जाए
ना चले कोई उम्र भर संग ना साथी सदा के हुए,

दिन का साथी सूर्य बनता, रात में शशि और तारे 
एक जाये एक आये प्रकृति नियम में सब बंधे हुए,

ना रूठे मुझसे कोई अपना सदा जतन मैंने किए
अपने मेरे अपने रहें सोच हर बार हम हारा किए,

होती कहां राह आसान जीते जो ना विचलित हुए
वो फूल ही रहते सुरक्षित कांटे जिनके साथी हुए।।

- गरिमा सक्सेना
  
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