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khamukha aankhen badnam ho gayi

मेरे अल्फाज़

खामखां अांखें बदनाम हो गईं

Garima Anjul

15 कविताएं

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अब ना रोको हमें पहलू में, देखो सुबह से शाम हो गई
मिलने आउंगी कल फिर से मैं, जिंदगी तेरे नाम हो गई।

तेरी चाहत खींचती मुझको, जैसे कोई लगाम हो गई 
बची पहचान तुमसे मेरी, मैं खुद तो गुमनाम हो गई।

गये होंगे मयखाने को, खामखां अांखें बदनाम हो गईं
कौन पीता भला नज़रों से, आंखें ना हुई जाम हो गईं।

मैंने तो की ना कोई ख़ता, अब बेकसूरी इल्जाम हो गई
काम की थी पहले बहुत, अब हर कोशिश नाकाम हो गई।

- गरिमा
 
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