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Bandhan

मेरे अल्फाज़

बंधन

Garima Anjul

15 कविताएं

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प्यार है यह मेरा कोई पाश बंधन नहीं,
जब जी चाहे उड़ जाना पंछी की तरह,
मुझको मालूम है आओगे लौट कर,
दिल से सुंदर मेरे कोई उपवन नहीं।

तोड़ देते हो दिल मेरा हर बार क्यों,
कांच का ये कोई दर्पण तो नहीं,
गए मुंह मोड़ के यूं तुम पहले भी,
हुई तो ऐसी कोई अपनी अनबन नहीं।
प्यार है यह मेरा....

गुनगुनी धूप सी साथ तेरे होऊंगी सदा,
कुसुमित हो जाओगे मेरे आगोश में,
प्रीत बेलें ये कोमल ना कि जंजीर हैं,
बंद कमरे सी इसमें घुटन तो नहीं।
प्यार है यह मेरा....

ये सांसें यह धड़कन मेरी अब नहीं,
सब बंधक हुई बस तेरे नाम की,
आहुति दी आठों प्रहर प्रीत के कुंड में,
इससे ज्यादा शेष कोई अर्पण नहीं।
प्यार है यह मेरा....

उलझनों के बंधनों को तुम तोड़ दो,
समझो मेरे ह्रदय की सच्चाई को,
रहेगा यह मौसम सुहाना सदा तेरे लिए,
यह एक मास का कोई सावन नहीं।
प्यार है यह मेरा....

ना कसमें ना रस्में कोई होंगी यहां,
चाहतों का समुंदर लिए अपना जहां,
बांध लूंगी वह बंधन पिया तुमसे मैं,
के होगा जिसमें कोई बंधन नहीं।।
प्यार है यह मेरा....

- गरिमा सक्सेना

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