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gale milo hans karake to bakarid mubarak

मेरे अल्फाज़

गले मिलो हँस करके तो बकरीद मुबारक

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

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अहम करो कुरबान अगर तो ईद मुबारक
अमन चैन सौहार्द प्रेम की ईद मुबारक
बेजुबान को जबह करोगे क्या पाओगे
प्रेम करो औ पुन्य कमाओ ईद मुबारक

कभी श्वेत औ श्याम कभी चमकीला तेवर
शांति और सौहार्द यही पर्वों के जेवर
कुर्बानी की ईद तुम्हे संग ईद मुबारक
गले मिलो हँस करके तो बकरीद मुबारक

द्वेष ईर्ष्या को भूलो तो ईद मुबारक
रामू औ अशफाक मिलें तो ईद मुबारक
बखरी द्वारा और मुहारा खुन्नस छोड़ो
शांति और सुख कायम है तो ईद मुबारक

- अतुल अवस्थी*अतुल*

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