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मेरे अल्फाज़

ईश्वर

किसी भूखे को जो इक वक़्त की
रोटी खिलाओ तो,
उसकी आंखों में उपजी तृप्ति को
जो देख पाओ तो,
ईश्वर है कहां बसता,
ये शायद जान जाओगे।

किसी मासूम की आंखों के आंसू
पोछ पाओ तो,
निश्छल मुस्कान पर उसकी अगर
वारे तुम जाओ तो,
ईश्वर है कहां बसता,
ये शायद जान जाओगे।

किसी भटके को रौशन राह
ग़र जो तुम दिखा पाओ,
किसी मज़लूम को इंसाफ
ग़र जो तुम दिला पाओ,
ईश्वर है कहां बसता,
ये शायद जान जाओगे।

उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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