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poems v/s Love letters

मेरे अल्फाज़

प्रेम पत्र बनाम कविता

Deepika Ghildiyal

1 कविता

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एक मुश्किल दिन के बाद,
जब रात नींद के कटोरे
कहीं और भर
उसके पास आती है,
वो लिखती है प्रेमपत्र
तुम उसे कविता समझते हो
उसे अजीब नहीं लगता,
जाहिर कर देना अपने सारे डर
कर देती है अपनी सारी तकलीफें नुमायां
आखिरी पंक्ति के आखिरी शब्द
भीग जाते हैं आंसुओं से
तुम वाह कहते हो.
उकेरती हैं कुछ निशान
गुलाबी कागज़ पर खुरदुरी उंगलियां
जिन्हें नजरअंदाज़ कर,
तुम मोड़ देते हो कागज़
जानते हुए भी कि
बिना पते के प्रेम पत्र
हमेशा गलत हाथ जायेंगे
वो लिखती है प्रेमपत्र
तुम उसे कविता पढ़ते हो


उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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