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deep ban kar timir ko hare jindagi ko sajate rahe

मेरे अल्फाज़

दीप बन कर तिमिर को हरें जिंदगी को सजाते रहें

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

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पोंछ कर आँसुओं की लड़ी,
दुखिया संग मुस्कुराते रहें ॥

अनभला हो किसी का नहीं,
दुःख को बस भगाते रहें ॥

आयी प्यारी दिवाली सखे,
प्यार के स्वर बजाते रहें ॥

मन में जो भी अँधेरा भरा,
उसको हर पल हटाते रहें ॥

दीप बन कर तिमिर को हरें
जिंदगी को सजाते रहें ॥

राम सबका करेंगे भला,
दियरा संग जगमगाते रहें ॥

- अतुल अवस्थी 'अतुल'

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