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मेरे अल्फाज़

अब जब दिल्ली धुआं धुआं है

Dandpani Nahak

17 कविताएं

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अब जब दिल्ली धुआँ धुआँ है
पूछते हो गलती कहां कहां है।

एक शहर और दो दो सरकारें
फिर भी समस्या जहां वहां है।

सांसों को भी क्या छुट्टी दोगे
बच्चों के स्कूल जहां जहां है

जब अपने पैरों मारी कुल्हाड़ी
तो क्यों चोट देखते यहां वहां है।

दिल्ली जाने तुम कब सुधरोगी
ये जो रोग तुम्हारा नहीं नया है।

- दंडपानी नाहक

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