आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   bharat ke bhavishy niramata ki jay jay ho

मेरे अल्फाज़

भारत के भविष्य निर्माता की जय जय हो

अतुल अवस्थी

27 कविताएं

32 Views
भारत के भविष्य निर्माता की जय जय हो
जनगण मन गुरू भाग्य विधाता की जय जय हो। 

आंसू पीकर भाव संवारे,
ज्ञानदीप शिष्यों पर वारे।
खुद अंधियारे में जीता है,
मगर शिष्य प्राणों से प्यारे।
ऐसे गुरू का नमन और अभिनंदन जय हो
भारत के भविष्य निर्माता की जय जय हो।

रोज़ आंसुओं की स्याही भर कलम चलाता,
दुःख में रहकर भी संगीत सुनहरा गाता।
नहीं भविष्य पता है खुद का,
पर भविष्य को रोज़ संवारे।
कभी नीति भूगोल पढ़ाता,
कभी चांद संग लाता तारे।
गणित पढाकर शून्य निहारे जय जय जय हो,
भारत के भविष्य निर्माता की जय जय हो।

अक्षर-अक्षर जोड़ रोज़ बुनियाद बनाता,
शब्द वाक्य कैसे बनता है रोज़ बताता।
वही गुरू जीवन के सूत्रों में है उलझा,
जीवन का व्याकरण नहीँ अब तक है सुलझा।
फ़िर भी एका के है गीत सुनाता प्यारे,
लाज तिरंगे की रखने को मन को मारे।
कष्टों में मुस्कान बिखेरे गुरू की जय हो,
भारत के भविष्य निर्माता की जय जय हो।

- अतुल अवस्थी*अतुल 

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!