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Heart is out of controle

मेरे अल्फाज़

दिल ना जाये सम्भाला

bhagawati vyas

22 कविताएं

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हैं गुलाब तन वदन खिले हैं, औ अंदाज़ निराला 
लगे नशे में डूबे से हम, हमें मिली मधुशाला ।।

रंगत खिली खिली लगती है, काया अलसाई सी
अपने हिस्से कहाँ बचा कुछ, केवल है घोटाला ।।

नज़रें यहां बयां करती हैं, तुम जीते सब हारे 
अपने जैसों का तो हिस्से, आया है दीवाला ।।

हलचल यहां हुई है भारी, सभी अचम्भित लगते 
कैसे काबू में रखते हम, दिल न जाये संभाला।।

खुद में ही खोयी लगती हो, कहां फिकर दुनिया की 
तुमसे चाह जगा बैठे यों, है सब गड़बड़ झाला ।।

इतनी भी मगरूर बनो ना, नज़रें ज़रा उठा लो 
थोड़ी सी तो प्रीत निभा लो, करो न हीलहवाला ।।

- भगवती व्यास

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