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मेरे अल्फाज़

बंदनी

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बंदनी
एक सीमित दायरे में
अदृश्य डोर से
एक केंद्र बिंदू
से बंधी
उन्मुक्त उड़ती
एक परिधि
के भीतर
देखती रहती
अनगिनत स्वप्न
उनींदे नयन से
जिनको
भोर की लाली
होते ही
आंखो में
गहरे काजल
की परत से
छुपा देती
स्व-अस्तित्व की
अभिलाषाओं से
नदारद
काठ देह
को ढोती
स्तब्ध
कठपुतली सी
बंदनी
बंधनों की

- प्रतिभा



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