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Aazad Bharat

मेरे अल्फाज़

आज़ाद भारत

ashutosh singh

1 कविता

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अंधियारो में भरे उजाला, मन उमंग जो भरले
सफल सभी स्वप्न अपने हो,द्रिड निश्चय जो करलें।

मिलके आओ भारत-भाग्य को, सपनो से अपने जोड़े
मज़हबो में जो बाटें दीवारें, एकजुट हो उनको तोड़े।

हो एक साज और एक राग, मानवता हो धर्म हमारा
ये प्रेम गीत हो उनका प्रतिक,जो मिले सुर मेरा तुम्हारा।

मिलके संभाले अपनी धरती, हो तिरंगा कभी न नीचा ..
अभिमान पूर्ण चौड़ा सीना अपना,माथा हो सबसे ऊंचा

आज़ादी की इस पावन बेला को मेहनत से अपने सींचे
अपनी चमक से सुबह हो उनकी, जो हमसे आँखें भींचें।

अनेक ऋतुएँ,बहती कलकल नदियां ऐसा अद्भुत देश हमारा
ये प्रेम गीत हो उनका प्रतिक,जो मिले सुर मेरा तुम्हारा!

उन वतन के वीरो को नमन, जिन्होंने प्राण आहुति लगाई
खुद जलके हमे रौशन किया, आज़ादी में सांस दिलाई ..

उन शूरवीर को भी शत नमन, जो सरहद पर रहते हैं
हम चैन से सो सकें,इसलिए वो दिन-रात जागा करते हैं!

केसर सी वादियां जहाँ सब्ज़ हो धरती, ऐसा पावन देश हमारा
रंग चिट्टा नियत का प्रतिक,लहरें केसर-सब्ज़-चिट्टा तिरंगा प्यारा !

- आशुतोष सिंह 


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