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Tumhare Hone Ka Ahsaas !!
मेरे अल्फाज़

तुम्हारे होने का एहसास...

रात अब कभी ख़ामोश नहीं लगती
दिन नहीं करता बेचैन
जो तुम्हारे साथ होने का एहसास साथ हो

अब किसी गीत को सुनते हुए
उसके बोलों की तरफ़ ध्यान नहीं जाता
बल्कि एक पूरी फ़िल्म दिमाग में चलने लगती है
महसूस होता है कि तुम्हारे लिए ही लिखे गये हैं सारे गीत
सारे शब्द तुम्हारा ज़िक्र करने के लिए बने हैं
धुनें हैं कि तुम्हारी कुछ मासूम सी हरकतें

अचानक आसमान कुछ और नीला हो गया है
तारों का प्रकाश बढ़ गया है कई सौ गुना
बर्फ़ अब भला और कितनी सफ़ेद होना चाहती है
और चांद है कि महीने के हर दिन पूरा निकलना चाह रहा है

शाखों ने सजा ली हैं हरी पत्तियां
भौरों ने याद कर लिए हैं नए गीत
तितलियों ने रंग दिए हैं पर कुछ और खूबसूरत रंगों से
और शहर से हो गया है इश्क़ सा कुछ

जनवरी अब वैसी सर्द नहीं रही
न रही बारिश में छाते की जरुरत अब
तुम्हारे होने के अहसास से,
मैं भी अब कहां पहले सा रह गया हूं ।

उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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