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THE GIFT

मेरे अल्फाज़

हमारे पाठक अंकित सोच रहे हैं, प्रिये को कौन सा दें उपहार

arkit pandey

1 कविता

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मैं रहा रैन भर सोचता बस प्रिये,
दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें।

प्रातः आकाश की लालिमा दूँ तुम्हें,
या दूँ पंछियों का चहचहाता वो स्वर,

नीले आकाश की नीलिमा दूँ तुम्हें,
या दूँ भेंट पुष्पों का गुच्छा मधुर,

पर प्रकृति सी सजल तुम स्वयं हो प्रिये,
क्या ये उपहार देना उचित है तुम्हें।

मैं रहा रैन भर सोचता बस प्रिये,
दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें।

अपने पुण्यो का सारा मैं फल दूँ तुम्हें,
या दूँ अपने हिस्से की सारी हसीं,

विधाता की स्याही कलम दूँ तुम्हें,
लिख लो तकदीर में अपने हर पल खुशी,

है जो दिल वो तेरा,है जो जाँ वो तेरी,
संग मेरे बचा क्या समर्पण को तुम्हे।

मैं रहा रैन भर सोचता बस यही,
दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें।

हाथ खाली है मेरे मैं क्या दूँ तुम्हें,
इस सघन विश्व मे भी नही कुछ मेरा,

सारा जीवन समर्पित किया है तुम्हें,
मैं रहा बस तेरा,और रहूँगा तेरा,

दे रहा हूँ मैं तुमको वचन ये प्रिये,
सारे जीवन पर मेरे अब हक है तुम्हे।

मैं रहा रैन भर सोचता बस प्रिये,
दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें।

- अंकित पांडेय

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