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मेरे अल्फाज़

चुभते हुए प्रश्न हैं कल के

Amresh Singh

37 कविताएं

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_____(चुभते हुए प्रश्न)_____

चुभते हुए प्रश्न हैं
कल के...........
शेर नही हैं किसी
गज़ल के...........

अपने हिस्से की मेहनत
दरिया ने हरदम की है,
अभिमानी सागर कब
आया है,................

पैरों पर चल के,.......
शेर नही हैं किसी
गज़ल के,.........

पतित-पावनी सदानीरा में
जहर घुल चुका है,........
कब बहुरेंगे दिन बोलो
दूषित गंगा जल के,
शेर नही हैं किसी
गज़ल के,.........
.
सत्ता की साज़िश में
पड़कर................
पांचाली छली गयी है,
शकुनी के हाथों में
अब तक पाशे हैं
कौरव दल के,...
शेर नही हैं किसी
गज़ल के,.........

जानकी कहां सुरक्षित है
अब लक्ष्मण रेखा में,....
पहुँच गया पाखंडी रावण
रिश्तों में रूप बदल के,...
शेर नही हैं किसी
गज़ल के,........
.
अधनंगे चरवाहे तुम
मुफ़लिसी का सच पूंछो,
अपनी आँखों से वो
कब देखेगा सपने
मख़मल के,......
शेर नही हैं
किसी गज़ल के,..
.
झोपड़ी हक़ अब तक
गिरवी है "अमरेश"
अभी कहाँ बदले हैं
इरादे सामंती
राजमहल के,...
शेर नही हैं किसी
गज़ल के।


- अमरेश सिंह भदोरिया



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