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Zindagi tum se hi (maa-papa)

मेरे अल्फाज़

ज़िन्दगी तुमसे ही

akanskha pandey

17 कविताएं

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तुम न होते तो यूं ज़िन्दगी में कोई मुकाम न मिलता,
मेरी ज़िंदगी का हर एक पल तुमसे ही शुरू हुआ। 

और तुम दोनों पर ही खत्म होगा,
मां - बाप की एहमियत क्या होती है कोई मुझसे पूछे। 

उनके बिना मेरा कोई आधार नही,
उनका प्यार दुलार मिलता रहे मुझे यूं सारी उम्र। 

कितने नसीब से ऐसे माँ बाप मिले,
बेटी होने का कर्तव्य निभाउंगी आंखों में न हो आंसू क़भी। 

खुद की मुस्कान तुम दोनों पर लुटाऊंगी,
पापा की वो सारी बाते आज भी जब याद आती है। 

कैसे मुझे दुनिया की सैर कराते थे हर इच्छा पूरी करते थे,
माँ ने भी हमेशा मेरा साथ दिया जब कोई तकलीफ हुई। 

मुझे कभी रोने न दिया हर आंसू मेरा पोछ दिया,
धन्य हूं ऐसे माँ बाप को पाकर जिन्होंने हर राह पर मुझे थाम लिया,

हर जन्म में तुम दोनों ही को पाना चाहती हूं
तुम्हारे कदमो पर जमाने की हर खुशी लुटाना चाहती हूं।

मेरे पापा मेरी ज़िंदगी का अभिमान है, उनकी वजह से,
आज मेरे पास ये पूरा आसमान है। 

- "उपासना पाण्डेय"ऋषिकांत 


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