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Khwab tere

मेरे अल्फाज़

ख़्वाब तेरे

akanskha pandey

17 कविताएं

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कितने दिनों बाद दिखे तुम, कहां थे तुम
न कोई खत न कोई खबर
कहीं और तय कर रहे थे सफर
दिन रात तुम्हें ही याद किया
न जाने कितना इंतजार किया
वो भुला दी बाते मैंने जब तुम नाराज हुए थे
मगर अब मान भी जाओ जरा
कितना तन्हा वक़्त गुजरा है तेरे बिन
ये इन सूनी आंखों से पूछो
कितने जागे है हम ये उस रात से पूछो
उन तारों से पूछो उस अन्धेरी रातों से पूछो
उस अकेले चांद से पूछ, हर रोज घंटो चांद से
बातें अनगिनत की है मैंने
हम दोनों का हाल एक जैसा ही था
वो अपनी चांदनी से दूर था
और मैं तुम मुझसे दूर थी कहीं।।

- उपासना पाण्डेय 'आकांक्षा'

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हरदोई (उत्तर प्रदेश)
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