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Chhanv ho tum

मेरे अल्फाज़

छांव हो तुम

akanskha pandey

17 कविताएं

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सुनो तुम धूप हो, छांव भी तुम,
तुम मेरे जीवन का आधार हो,
खुशियां भी तुमसे ही मिलीं,
हर गम को बांटने वाले तुम ही हो,
तुमने जीने की एक आस दी,
मेरे कोरे से जीवन में खुशियों के रंग भरने वाले,
तुमसे ही मेरा संसार है,
इस दुनिया का हर गम सह लेंगे हम,
मगर तुमसे दूर होने से घबराती हूँ,
तुम्हारी हर बात को ध्यान से सुनती हूँ,
फिर खुद से ही एक सवाल करती हूँ,
क्या तुम्हारे काबिल हूं मैं,
बस यही एक बात सोचती हूं,
माना कि हम तुमसे बहुत अलग है,
तुम्हारी ज़िन्दगी कुछ अलग है,
अब खुद को बदलने की कोशिश कर रही हूँ,
बस ज़िन्दगी को जीने का हुनर सीख रही हूँ।

- उपासना पाण्डेय 'आकांक्षा' 
   हरदोई, उत्तर प्रदेश

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