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मेरे अल्फाज़

मजाक था

Adarsh Yadav

2 कविताएं

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तुमने जो किया है
अगर वही मैं भी करता
तो भी तुम क्या यही कहती
अरे छोडो़ फालतू की बातें।

वैसा कुछ भी नहीं है
वो एक मजाक था
क्या वैसे ही मान जाती तुम
जैसे मैं मान गया।

क्या वैसे ही हंसती तुम?
जैसे मैं हंस के टाल गया
खैर छोडो़ 
लेकिन ये बताओ
ये सपने,वादे,कसमे।

क्या इन्हें भी एक रोज
ऐसे हंसते हंसते कह दोगी
अरे छोड़ो वैसा कुछ भी नहीं हझ
वो एक मजाक था।

- आदर्श

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