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Try try.. Till u die

मेरे अल्फाज़

व्यथा एक मन की

Aarti Sharma

2 कविताएं

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एक डोर से बांधे रखा था तुझे...
तेरी भुख मिटाने को...
वो डोर टूटी.. एहसास भी छूटे...
तुने ममता भी भूलायी.. देख मेरे सपने भी टूटे..
तेरे घुटनो को मरहम लगा के कभी हाथ नहीं पकड़ा..
तु आजाद था.. फिर से दौड़ने को. फिर से गिरने को..
आज कल सा ना हो तो अब कल देखना ही नहीं...
ये मैने कब सिखलाया था..
किस इम्तिहां में हार के तूने दरवाजा बन्द पाया था...
एक बात बताने की बेचैनी अब कहां खोने लगी है..
अपने मसलो से हारी आये दिन ज़िन्दगी गंवा रही...
कौन कहता है ये पीढ़ी अब समझदार हो रही है...

उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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