आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mera Shahar Mera Shayar ›   Mahangai ki oochai
Mahangai ki oochai

मेरा शहर मेरा शायर

महगााँइ की ऊंचाई

matri times

3 कविताएं

16 Views
महगाँई ने छू ली ऊँचाई

महगाँई ने छू ली ऊँचाई ओर टमाटर ने कर दी बेवफाई
प्याज थाली से भूत की तरह गायब है
अौर टमाटर 'दूर हटो ऐ दुनिया वालों' चीख चीख कर गा रहा 
थाली भी शमा शमा कर तोड़ाे न दिल हमारा गाये जा रही
सोच सोच कर दिल परेशान है कि जाने कहाँ गये वो बुरे दिन जब प्याज टमाटर तो मिल जाते थे 
लोग इन 3 दोस्तों के प्यार की कसमें खाते थे ।

- रितु

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!