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Good thought make a good man

मेरा शहर मेरा शायर

न जाने कब तुम्हारी याद की बदली बरस जाये

Kavi Munendra

6 कविताएं

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न मिलती कामयाबी पर गलत चलकर नहीं आया
मैं आया हूँ नज़र में पर कभी गिरकर नहीं आया।

बहुत ख़ामोश लगता है तुम्हारे शहर का आलम,
बहुत दिन से किसी आँगन कोई पत्थर नहीं आया।

बनाई कड़ी मेहनत से हवेली धूप में जिसने,
भरी बरसात उसके सर कोई छप्पर नहीं आया।

गुनाहों से उसे बचने की ऐसी तरबियत हासिल,
अभी तक कोई भी है दाग उसके सर नहीं आया।

बहुत आये खुशी में दर हमारे झूमने वाले,
मगर कोई आदमी क्या वक्त पर किन्नर नहीं आया।

- कवि मुनेन्द्र

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