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बदल गया देश

Ghanshyam Bairagi

21 कविताएं

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बदल रहा देश

बदल गया और
बदल रहा देश 
तड़पता देख
सड़क पर कोई,
छोड़ चले हम
कैसे गम हैं।।

दुनिया इतनी
बदल गई है,
बस इंसानियत
इतनी कम है ।।

देश बाजार में
खड़ा है कैसे,
मुंह चिढ़ाती
रूपये कम हैं।।

फिर भी देखो
बदल रहा देश,
भ्रष्टाचार भी
चरम पर है ।।

पैसे नहीं हैं
फिर भी गम है,
बाजार खुले हैं
नोट बंद है ।।

ऐसे ही तो
बदल रहा देश,
आँखों में भी
आँसू कम हैं 
फिर भी देखो
बदल रहा देश ।।

- घनश्याम जी.बैरागी
  नंदिनी-भिलाईनगर ( छ.ग. )
  08827676333

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