आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mera Shahar Mera Shayar ›   messenger of love "taajmahal"
messenger of love "taajmahal"

मेरा शहर मेरा शायर

मुहब्बत का गीत ताजमहल

BRIJMOHAN SRIVASTAV

6 कविताएं

154 Views
हुस्न के क़दमों में,
रखा 'ताज़' जिसने 
हम उसे शहंशाह,
कहते हैं।
 
संगमरमर का बदन,
रूह कोई पाकीज़ा 
उसके आंचल के तले
एक ग़ज़ल कहते हैं।
 
सारे आशिक़ करें
यहां सजदा
हम दीवाने
शहर में रहते हैं।
 
ये शहर कब्र का मजारों का
हर नज़र के लिए नजारों का
एक मुमताज यहां सोई है
प्यार पैगाम है इशारों का
जैसे दुल्हन सजी सी बैठी है
फिजां में गीत है कहारों का
ये नदी घाट- घाट बहती है
फिर भी चर्चा है इन किनारों का
एक नजीर और सूर बसते हैं
देखो मेला मिला बहारों का
ये शहर कब्र का मजारों का
हर नज़र के लिए नजारों का

- ब्रजमोहन शरद


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 

 
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!